क्या मतदाता करेंगे अपने विवेक का उपयोग ?
अपने मत का प्रयोग करे, मतदान न करे, क्योंकि दान में बाद उस चीज पर आपका अधिकार नहीं रहता है, मत आपका अधिकार है न की कोई वास्तु जो दान कर दी जाये।
चुनाव का आज ५वा चरण है, और बहुत से राजनीती के बाहुबलियों का भविष्य आज मतदाताओं की ऊँगली पर टिका है, देखना ये है की क्या मतदाता आज अपनी ऊँगली का साथ देकर किसे जिताता है और किसे ऊँगली करके और ५ साल तक इंतज़ार करने को मज़बूर करेगा? देखना ये है की क्या इस बार भी मतदाता बड़े-बड़े राजनितिक कद के लोगों को बिना किसी काम किये फिर से अपना मत देकर मूर्खों की जमात में खड़ा होता है ? या फिर अपने विवेक का इस्तेमाल करके उन उम्मीदवारों को उनकी अपनी हैसियत का एहसास करवाता है ? और मतदाता बताएगा की काम करोगे तब ही मत मिलेगा नहीं तो फिर मिलेगा ठेंगा।
१५-१५ सालों से कुछ सीट पर तो कुछ पर ३०-३० साल बड़े बड़े नाम सिर्फ नाम के बल पर और अपनी साख के बल पर एक ही लोकसभा सीट अपनी धाक जमाये रखा है, और जनता को मदारी की तरह अपने डमरू की धप पर नाचते रहे। आश्चर्य होता है की कैसे जनता आखिर एक ही राजनेता को सिर्फ उसके नाम के बल पर दुबारा चुन कर भेज देती है ये जानते हुए की ये नेता फिर ५ साल उस छेत्र में नहीं दिखाई देगा।
अब हालाँकि सोशल नेटवर्किंग का जमाना है जिसका एक पहलु ये है की लोग जागरूक हो चुके हैं, भले ही वो पूरी तरह से अपने आप को इस लोकतंत्र के महा कुम्भ में सम्मलित न कर पा रहे हों लेकिन उन्हें इतनी तो समझ है की उनके लिए क्या सही है और क्या गलत है, बेशक वो अपने वोट देते समय किसी जाति, धर्म, या नाम पर वोट करते हों, लेकिन उन्हें पता तो होता है की वो जो कर ,रहे हैं वो कहीं न कहीं गलत या सही है।
समय है अपनी भागीदारी को और सुढृढ़ करने का, समय है अपने चुनाव को और सशक्त करने का, समय है ये बताने का की अगर आप नेता, अभिनेता, खिलाडी, मदारी जो भी हों अगर आप को वोट चाहिए तो चुनाव के बाद भी ५ साल आपको मतदाता के साथ ही खड़ा रहना पड़ेगा, चुनाव के बाद भी आपको छेत्र का विकास करना पड़ेगा, चुनाव के बाद भी आपको हाँथ जोड़ कर खड़े रहना पड़ेगा, तब ही आज का जागरूक मतदाता आपको वोट देगा
चुनाव है, घर से निकले और अपने मत का प्रयोग करे, मतदान न करे, क्योंकि दान में बाद उस चीज पर आपका अधिकार नहीं रहता है, मत आपका अधिकार है न की कोई वास्तु जो दान कर दी जाये।
चुनाव करे, सही चुने और देश को सशक्त बनाये
अपने मत का प्रयोग करे, मतदान न करे, क्योंकि दान में बाद उस चीज पर आपका अधिकार नहीं रहता है, मत आपका अधिकार है न की कोई वास्तु जो दान कर दी जाये।
चुनाव का आज ५वा चरण है, और बहुत से राजनीती के बाहुबलियों का भविष्य आज मतदाताओं की ऊँगली पर टिका है, देखना ये है की क्या मतदाता आज अपनी ऊँगली का साथ देकर किसे जिताता है और किसे ऊँगली करके और ५ साल तक इंतज़ार करने को मज़बूर करेगा? देखना ये है की क्या इस बार भी मतदाता बड़े-बड़े राजनितिक कद के लोगों को बिना किसी काम किये फिर से अपना मत देकर मूर्खों की जमात में खड़ा होता है ? या फिर अपने विवेक का इस्तेमाल करके उन उम्मीदवारों को उनकी अपनी हैसियत का एहसास करवाता है ? और मतदाता बताएगा की काम करोगे तब ही मत मिलेगा नहीं तो फिर मिलेगा ठेंगा।
१५-१५ सालों से कुछ सीट पर तो कुछ पर ३०-३० साल बड़े बड़े नाम सिर्फ नाम के बल पर और अपनी साख के बल पर एक ही लोकसभा सीट अपनी धाक जमाये रखा है, और जनता को मदारी की तरह अपने डमरू की धप पर नाचते रहे। आश्चर्य होता है की कैसे जनता आखिर एक ही राजनेता को सिर्फ उसके नाम के बल पर दुबारा चुन कर भेज देती है ये जानते हुए की ये नेता फिर ५ साल उस छेत्र में नहीं दिखाई देगा।
अब हालाँकि सोशल नेटवर्किंग का जमाना है जिसका एक पहलु ये है की लोग जागरूक हो चुके हैं, भले ही वो पूरी तरह से अपने आप को इस लोकतंत्र के महा कुम्भ में सम्मलित न कर पा रहे हों लेकिन उन्हें इतनी तो समझ है की उनके लिए क्या सही है और क्या गलत है, बेशक वो अपने वोट देते समय किसी जाति, धर्म, या नाम पर वोट करते हों, लेकिन उन्हें पता तो होता है की वो जो कर ,रहे हैं वो कहीं न कहीं गलत या सही है।
समय है अपनी भागीदारी को और सुढृढ़ करने का, समय है अपने चुनाव को और सशक्त करने का, समय है ये बताने का की अगर आप नेता, अभिनेता, खिलाडी, मदारी जो भी हों अगर आप को वोट चाहिए तो चुनाव के बाद भी ५ साल आपको मतदाता के साथ ही खड़ा रहना पड़ेगा, चुनाव के बाद भी आपको छेत्र का विकास करना पड़ेगा, चुनाव के बाद भी आपको हाँथ जोड़ कर खड़े रहना पड़ेगा, तब ही आज का जागरूक मतदाता आपको वोट देगा
चुनाव है, घर से निकले और अपने मत का प्रयोग करे, मतदान न करे, क्योंकि दान में बाद उस चीज पर आपका अधिकार नहीं रहता है, मत आपका अधिकार है न की कोई वास्तु जो दान कर दी जाये।
चुनाव करे, सही चुने और देश को सशक्त बनाये
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