Monday, April 22, 2019

भक्त बनाम चमचा

भक्त बनाम चमचा
यह विषय बहुत ही रोचक है आज के परिवेश में, जब की राष्ट्र में चुनावी बिसात बिझ चुकी है, हर राजनितिक दाल अपनी अपनी चाल चल रहे हैं, कभी शय तो कभी मात का खेल चाल रहा है, इस बीच में प्यादे बने हैं, सभी दलों के समर्थक, या यूँ कह लो की भक्त और चमचे।   अब तक आपको तो मेरी बात समझ में आ ही गयी होगी, भक्त बोले तो बी जे पी का समर्थक और चमचा बोले तो कांग्रेस और सहयोगी दलों का समर्थक। 
अब जब सोशल मिडिया का जमाना है तो भक्त और चमचों की भिड़ंत भी बहुत रोचक होती है, भक्त जहाँ मोदी को वापस सत्ता दिलाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं तो वही चमचे भी किसी से कम नहीं हैं, राहुल गाँधी के समर्थन में कुछ कर जाने को तत्पर हैं, हाँ बेशक इसमें कुछ लोग पार्टी की ओर से संचालित होते हैं लेकिन बहुतायत तो सिर्फ जंग में भिड़े हुए हैं। 
अरे अब आप को लग रहा होगा की जंग कैसी ? अरे भाई साहब ये जंग ही तो है, कहते हैं न की प्यार और जंग में सब कुछ जायज है, तो इसी लिए ये भक्त और चमचे इस जंग में किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं, इसकी माँ, उसकी बहन ये सब तो बहुत ही सामान्य सी बात है, न ही शब्दों की मर्यादा है, और न ही वैचारिक शुद्धता , एक तरह का मानसिक दिवालियापन सा है, होड़ लगी है तो सिर्फ अपने आप को एक समूह को सही ठहराने की, अगर वो गलत हो तो भी जंग तो जीतने ही है, भले ही उस विषय की समझ न हो, लेकिन विषय पर अपनी मूर्खता के झंडे तो गाड़ने ही हैं। 
चुनाव है कोई न कोई पार्टी जीत भी जाएगी, लेकिन देखिये इस चक्कर में आप कहीं इंसान से, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, दलित, सवर्ण, यादव इत्यादि तो नहीं बनते जा रहे हैं? कहीं आप की अपनी वैचारिक स्वछन्दता किसी की गुलाम तो नहीं बन जा रही है? कहीं आप की सोंच को कुंठित तो नहीं कर दी जा रही है ? मेरा मानना है की हम सभी लोगों की अपनी अपनी आई क्यू लेवल अच्छी होती है, और जब में भेद चाल में चलते हैं, तो हमारी सोचने की शक्ति कुंद हो जाती यही, तो अपनी सोच को जिन्दा रखे
चुने वही जो सही हो, चुनाव है तो चुने जरूर।
DATAHE KI KALAM SE

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