दो सीट पर चुनाव लड़ना क्या पैसे की बर्बादी ? जिम्मेदार कौन ?
अक्सर लोकसभा हो या विधानसभा की चुनाव होता है तो ये देखा जाता है की कुछ राजनेता एक साथ दो अलग अलग छेत्रों से चुनाव लड़ते हैं, और ऐसा सन्देश देने की कोशिश करते हैं, की वो एक दो छेत्रों का प्रतिनिधित्व करके उस छेत्र की जनता को धन्य कर रहे हैं, या कोई अहसान कर रहे हैं ? एक साथ दो जगह चुनाव लड़ने का क्या औचित्य है? क्या ऐसा करने से वो जनप्रतिनिधि दो छेत्र का प्रतिनिधित्व कर सकता है अगर वो चुनाव जीत जायेगा ? ऐसे नहीं है जैसे ही कोई नेता एक साथ दो छेत्र से चुनाव जीतता है उसे तुरंत दो में से किसी एक छेत्र का चुनाव करना होता है फिर एक चुनाव छेत्र को छोड़ना पड़ता है, मतलब चुनाव आयोग को चुनाव के तुरंत बाद फिर से उपचुनाव करवाना अनिवार्य है।
यहाँ दो प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, पहला ये की ये जानते हुए की एक उम्मीदवार जो की दो-दो चुनाव छेत्र से चुनाव लड़ रहा है उसे आम जनता मूर्खों की तरह ये जानते हुए भी की चुनाव जीतते ही छोड़ कर चला जायेगा चुनाव की जीत क्यों दिलवा देती है ? क्या आम जनता इतनी मूर्ख है या उसे मूर्ख बनाना इतना आसान है की जो प्रतिनिधि उस छेत्र की जवाबदारी पहले से ही नहीं लेना चाहता है उसे आखिर क्यों अपना वोट देकर जिताया जाये ? आखिर उससे उस छेत्र की जनता को क्या हांसिल होगा ? क्या जनता को इस बात का एहसास है की एक चुनाव के बाद उसे फिर दूसरे उपचुनाव में झोंक दिया जायेगा ? क्या जनता के पास अपने कोई खुद के मुद्दे नहीं होते जिसके आधार पर वो निर्णय करे की उसे किस उम्मीदवार को वोट देना है ? या सिर्फ बहुचर्चित चेहरे के आगे जनता अपने सारे मुद्दे भूल कर गाय-बकरियों की तरह बूथ पर जाकर वोट डाल कर चली आती है ? सोचिये ?
दूसरा सबसे अहम् मुद्दा ये है की क्या उपचुनाव करवाने में देश के पैसों की बर्बादी नहीं होती ? जैसी की जानकारी है की चुनाव आयोग एक बूथ पर लगभग १० लाख रूपये खर्च करती है, और एक बूथ पर १४०० से ज्यादा वोटर्स नहीं हो सकते मतलब एक सीट पर करीब करीब २५० से ज्यादा बूथ २.५ से ३ करोड़ रूपए बर्बाद कर दिए जाते हैं, जैसे ही एक उमीदवार दो सीट से अपनी दावेदारी ठोकता है। क्या चुनाव आयोग ने कभी एक बाबत संज्ञान लिया ?
आवशयकता है चुनाव आयोग को कोई ऐसा नियम बनाये की यदि कोई उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव जीतता है और एक सीट छोड़ता है उस उम्मीदवार कोई चुनाव पर हुए खर्च चुनाव आयोग को वापस करने होंगे, साथ ही साथ छेत्र की जनता को भी सजग होना होगा की किसी ऐसे उम्मीदवार को वोट ही क्यों देना जो चुनाव से पहले ही उसका नहीं है।
सही चुने जरूर चुने, चुने जरूर
अक्सर लोकसभा हो या विधानसभा की चुनाव होता है तो ये देखा जाता है की कुछ राजनेता एक साथ दो अलग अलग छेत्रों से चुनाव लड़ते हैं, और ऐसा सन्देश देने की कोशिश करते हैं, की वो एक दो छेत्रों का प्रतिनिधित्व करके उस छेत्र की जनता को धन्य कर रहे हैं, या कोई अहसान कर रहे हैं ? एक साथ दो जगह चुनाव लड़ने का क्या औचित्य है? क्या ऐसा करने से वो जनप्रतिनिधि दो छेत्र का प्रतिनिधित्व कर सकता है अगर वो चुनाव जीत जायेगा ? ऐसे नहीं है जैसे ही कोई नेता एक साथ दो छेत्र से चुनाव जीतता है उसे तुरंत दो में से किसी एक छेत्र का चुनाव करना होता है फिर एक चुनाव छेत्र को छोड़ना पड़ता है, मतलब चुनाव आयोग को चुनाव के तुरंत बाद फिर से उपचुनाव करवाना अनिवार्य है।
यहाँ दो प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, पहला ये की ये जानते हुए की एक उम्मीदवार जो की दो-दो चुनाव छेत्र से चुनाव लड़ रहा है उसे आम जनता मूर्खों की तरह ये जानते हुए भी की चुनाव जीतते ही छोड़ कर चला जायेगा चुनाव की जीत क्यों दिलवा देती है ? क्या आम जनता इतनी मूर्ख है या उसे मूर्ख बनाना इतना आसान है की जो प्रतिनिधि उस छेत्र की जवाबदारी पहले से ही नहीं लेना चाहता है उसे आखिर क्यों अपना वोट देकर जिताया जाये ? आखिर उससे उस छेत्र की जनता को क्या हांसिल होगा ? क्या जनता को इस बात का एहसास है की एक चुनाव के बाद उसे फिर दूसरे उपचुनाव में झोंक दिया जायेगा ? क्या जनता के पास अपने कोई खुद के मुद्दे नहीं होते जिसके आधार पर वो निर्णय करे की उसे किस उम्मीदवार को वोट देना है ? या सिर्फ बहुचर्चित चेहरे के आगे जनता अपने सारे मुद्दे भूल कर गाय-बकरियों की तरह बूथ पर जाकर वोट डाल कर चली आती है ? सोचिये ?
दूसरा सबसे अहम् मुद्दा ये है की क्या उपचुनाव करवाने में देश के पैसों की बर्बादी नहीं होती ? जैसी की जानकारी है की चुनाव आयोग एक बूथ पर लगभग १० लाख रूपये खर्च करती है, और एक बूथ पर १४०० से ज्यादा वोटर्स नहीं हो सकते मतलब एक सीट पर करीब करीब २५० से ज्यादा बूथ २.५ से ३ करोड़ रूपए बर्बाद कर दिए जाते हैं, जैसे ही एक उमीदवार दो सीट से अपनी दावेदारी ठोकता है। क्या चुनाव आयोग ने कभी एक बाबत संज्ञान लिया ?
आवशयकता है चुनाव आयोग को कोई ऐसा नियम बनाये की यदि कोई उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव जीतता है और एक सीट छोड़ता है उस उम्मीदवार कोई चुनाव पर हुए खर्च चुनाव आयोग को वापस करने होंगे, साथ ही साथ छेत्र की जनता को भी सजग होना होगा की किसी ऐसे उम्मीदवार को वोट ही क्यों देना जो चुनाव से पहले ही उसका नहीं है।
सही चुने जरूर चुने, चुने जरूर
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