चुनावी घोषणापत्र
लोकसभा चुनाव हैं तो चुनावी घोषणा पत्र तो बनगे ही, कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया, जिसे बीजेपी ने हांथो-हाँथ लिया और तो और कांग्रेस पार्टी को देश विरोधी और देश द्रोही तक कर दिया, खैर ये तो होना ही होता है जब भी कोई पार्टी घोषणा पत्र जारी करती है तो विरोधी पार्टी उसका विरोध तो करती ही है नहीं तो चुनाव प्रचार में तड़का कैसे लगेगा। हालाँकि बीजेपी ने अभी तक अपना कोई घोषणा पत्र जारी नहीं किया है।
लेकिन हंसी तब आती है जब की छेत्रिय पार्टियां अपना अपना घोषणा पत्र लेकर आती हैं,जिन्हे ये अच्छे मालूम है की उनके पास उतने नंबर नहीं है जिससे वे उन घोषणा पात्र की किसी भी बात पर अमल नहीं कर सकते जब तक की वो किसी न किसी पार्टी से गठबंधन न का ले, जिसका मतलब ये होता है चुनाव पूर्व ये पार्टियां अपने अपने नंबर के एक गठबंधन करेंगी और सब मिला एक कॉमन मिनिमम प्रोग्रम बनाएंगी जिसका चुनावी घोषणा पत्र से कोई लेना देना नहीं होगा, क्योंकि इन पार्टियों के इतने नंबर तो होंगे नहीं जो की गठबंधन में अपनी सारी बातें मनवा ले।
अब किसी चीज की जरुरत है तो वो है मतदाताओं की जागरूकता की, उन्हें मालूम होना चाइये की जब लोकसभा की चुनाव हो रहा हो तो छेत्रिय पार्टियों का इतना महत्व नहीं रहता और कारण साफ़ है क्योंकि उनके पास संख्या बल नहीं होता, और इस बात चुनाव में तो तस्वीर ही एकदम अलग है, सभी छोटी मोती पार्टियों का एजेंडा सिर्फ और सिर्फ मोदी को हटाना है, उनके पास कोई भी रोड मैप नहीं है जिसे वो ये बता सके वो पहले तो सरकार में आएंगे कैसे, आयंगे तो उनका नेतृत्व कौन करेगा, और अगर नेतृत्व मिल भी गया तो वो मोदी सरकार के विकास के अजेंडे को आगे कैसे बढ़ाएंगे,
अब जनता को आगे आकर राजनितिक पार्टियों से ये सवाल करने होंगे की क्यों नहीं वो सब आगे आकर दूसरा या तीसरे मोर्चे को खड़ा करे और उसके बल पर जनता से वोट डालने की अपील करे, अगर जनता उन्हें पास करके भेजती है तो वो देश कर सरकार चलाएं
जनता को सजग रहना होगा और वोट उसी को डालना होगा जो देश को आगे बढ़ाये, न की परिवार को, न की देश में फिर से दलालों का जाल फैलाये, न की देश की जनता को भिखारी बनाये,
वोट डालिये और देश बचाइए मैंने अपना चुन लिया है आप अपना चुनिए
लोकसभा चुनाव हैं तो चुनावी घोषणा पत्र तो बनगे ही, कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया, जिसे बीजेपी ने हांथो-हाँथ लिया और तो और कांग्रेस पार्टी को देश विरोधी और देश द्रोही तक कर दिया, खैर ये तो होना ही होता है जब भी कोई पार्टी घोषणा पत्र जारी करती है तो विरोधी पार्टी उसका विरोध तो करती ही है नहीं तो चुनाव प्रचार में तड़का कैसे लगेगा। हालाँकि बीजेपी ने अभी तक अपना कोई घोषणा पत्र जारी नहीं किया है।
लेकिन हंसी तब आती है जब की छेत्रिय पार्टियां अपना अपना घोषणा पत्र लेकर आती हैं,जिन्हे ये अच्छे मालूम है की उनके पास उतने नंबर नहीं है जिससे वे उन घोषणा पात्र की किसी भी बात पर अमल नहीं कर सकते जब तक की वो किसी न किसी पार्टी से गठबंधन न का ले, जिसका मतलब ये होता है चुनाव पूर्व ये पार्टियां अपने अपने नंबर के एक गठबंधन करेंगी और सब मिला एक कॉमन मिनिमम प्रोग्रम बनाएंगी जिसका चुनावी घोषणा पत्र से कोई लेना देना नहीं होगा, क्योंकि इन पार्टियों के इतने नंबर तो होंगे नहीं जो की गठबंधन में अपनी सारी बातें मनवा ले।
अब किसी चीज की जरुरत है तो वो है मतदाताओं की जागरूकता की, उन्हें मालूम होना चाइये की जब लोकसभा की चुनाव हो रहा हो तो छेत्रिय पार्टियों का इतना महत्व नहीं रहता और कारण साफ़ है क्योंकि उनके पास संख्या बल नहीं होता, और इस बात चुनाव में तो तस्वीर ही एकदम अलग है, सभी छोटी मोती पार्टियों का एजेंडा सिर्फ और सिर्फ मोदी को हटाना है, उनके पास कोई भी रोड मैप नहीं है जिसे वो ये बता सके वो पहले तो सरकार में आएंगे कैसे, आयंगे तो उनका नेतृत्व कौन करेगा, और अगर नेतृत्व मिल भी गया तो वो मोदी सरकार के विकास के अजेंडे को आगे कैसे बढ़ाएंगे,
अब जनता को आगे आकर राजनितिक पार्टियों से ये सवाल करने होंगे की क्यों नहीं वो सब आगे आकर दूसरा या तीसरे मोर्चे को खड़ा करे और उसके बल पर जनता से वोट डालने की अपील करे, अगर जनता उन्हें पास करके भेजती है तो वो देश कर सरकार चलाएं
जनता को सजग रहना होगा और वोट उसी को डालना होगा जो देश को आगे बढ़ाये, न की परिवार को, न की देश में फिर से दलालों का जाल फैलाये, न की देश की जनता को भिखारी बनाये,
वोट डालिये और देश बचाइए मैंने अपना चुन लिया है आप अपना चुनिए
No comments:
Post a Comment